बुधवार, 27 जनवरी 2010

गणतंत्र में ही छिपें हैं लोकतंत्र के बीज

1 टिप्पणी:

ह्रदय पुष्प ने कहा…

"मनुष्य के इतिहास में असमानता और क्रूरता को वैधता प्रदान करने वाला इससे प्रभावशाली दर्शन दूसरा नहीं होगा."
यथार्थपरक आलेख - परिवर्तन की रफ़्तार निश्चित रूप से तेज होनी चाहिए.